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हंसिकाएं..कुछ हल्के-फुल्के पल.

जीवन में हंसने के मौके खुश रहने के मौके बड़े कम हैं.इसी तंगदिली के वक़्त तन्हादिली के वक़्त आपके चेहरों पे एक मुस्कान देता हूँ.कुछ देर के लिए कम-से-कम ये हंसी आपको सुकून दे. "एक बहु और एक सास उनके पुत्र थे -श्री प्रकाश बैठे थे उदास ,अचानक माँ ने कहा-बेटा कल्पना करो, मैं और बहु दोनों गंगा नहाने, हरिद्वार जायें,हमारा पाँव फिसल जाए, और हम दोनों ही डूब जाएँ . तो तू अपना धर्म कैसे निभाएगा ? डूबती हुई माँ और बीवी में, किसको बचायेगा? साहेबान-कदरदान-मेहरबान लड़का था परेशान उसके समझ में कोई युक्ति नहीं आई क्योंकि एक तरफ था कुँआ तो दूसरी तरफ थी खाई अचानक बीवी ने मुंह खोला यूँ बोला- 'हे प्राणनाथ !डूबती हुई माँ और बीवी में , ...