जरुरत है अब रंग बदलने की(भोजपुरी फिल्में)
जहाँ तक भोजपुरी फिल्मों के धडाधड आने की बात है वही एक समस्या इनके स्तरसे जुड़ी हुई तेज़ी से उभर रही है। ये समस्या इनके मेकिंग से ही जुड़ी नहीं है बल्कि इसके प्रस्तुतीकरण और कथ्य से भी जुड़ी है। 'उफान पर है भोजपुरी सिनेमा"शीर्षक के तहत मैंने एक ब्लॉग-पोस्ट पिछले महीने लिखी थी,इस पोस्ट पर प्राप्त टिप्पणियों में से एक ब्लॉगर साथी ने अपनी प्रतिक्रिया लिखी किवह सब तो ठीक है पर भोजपुरी सिनेमा गंभीर नहीं हो रहा है। उनकी बात के जवाब में मैंने यह लिखा कि अभी तो तेज़ी आई है आने वाले समय में कुछ सार्थक सिनेमा भी यह इंडस्ट्री देगा,जिसे राष्ट्रीय स्तर पर नोटिस किया जायेगा। मगर मुझे पता है कि यह भी इतना आसान नहीं है जबकि इस इंडस्ट्री में पैसा इन्वेस्ट करने वाले राजनेता,अब तक रेलवे ,सड़क की ठेकेदारी करने वाले सफेदपोश लोग और विशुद्ध व्यापारी लोग ही हैं। हाल ही में अपने घर से लौटा हूँ । वहां भोजपुरी की दो फिल्में देखीपहली का नाम था-बलम परदेसिया और दूसरी नई फ़िल्म थी -हम बाहुबली। हम बाहुबली आज के भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन और दिनेश लाल यादव' निरहुआ'अभिनीत थी, वही'बलम परदेसिया ८० के द...