Posts

Showing posts with the label अगल-बगल...

बस यही बचे थे?अब हाय-तौबा क्यों?

Image
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के निजी वस्तुओं की नीलामी की खबरें पिछले कई दिनों से सूचना-तंत्रों की सुर्खियों में थी.पता नहीं हर बार ऐसे मामलों पर हमारी गवर्नमेंट को क्या हो जाता है.शायद किसी कंट्री में ऐसा नहीं होता होगा जहां उसके फादर ऑफ़ द नेशन के साथ इतनी बेरुखी से पेश आया जाता है.बहरहाल,गांधीजी की चीज़ें अपनी सही जगह पर आ गयी हैं.देशवासियों को जय हो..जय हो...करना चाहिए.(शायद).पर,देखने वाली बात ये है कि हमारे जो वस्तुएं इतनी महत्वपूर्ण हैं, वह लाया किस आदमी ने ?जिस नशाबंदी और नशाखोरी के खिलाफ गांधीजी जीवन भर संघर्षरत रहे आखिर उसी फिल्ड के महारथी कहे जाने वाले शराब किंग "विजय माल्या"ने गांधीजी के इन सामानों को खरीद लिया और देश लेकर आये हैं,वह भी एक बड़ी भारी रकम देकर.अब अखबार वाले चिल्ला रहे हैं कि,आखिर एक शराब का व्यवसायी ऐसा कैसे कर सकता है,पर इतने से माल्या के इस काम का महत्त्व ख़त्म नहीं हो जाता.अजी जब हमारी सरकार इस हद तक सोई है कि अब राष्ट्रपिता तक से ही पोलिटिक्स कर दिया.अब तो ये भी नहीं कहा जा सकता कि ये (व्यवस्था)संवेदनहीन हो गयी है.कम से कम इस काम से विजय माल्या ने सम...

नौटंकी वाया रिक्शा-शो....जय हो...

Image
कल अपने समाजवादी नीतिश कुमार जी "slumdog.."देखने गए.आज के सभी अखबारों की सुर्खियों में उनकी रिक्शानशीन मुस्कुराती हुई तस्वीर छाई हुई है.साथ ही,इस फिल्म के बारे में उनके उदगार भी कि"मैं ज़रा भुसकौल छात्र हूँ इसलिए अब तक फिल्म नहीं देख पाया था.अब इनको कौन बताये कि ये अचानक ही रिक्शा सवारी के साथ फिल्म में उस रास्ते से जाना जो पटना का सबसे भीड़ वाला इलाका है,कोई यूँ ही वाली बात नहीं थी.सुशासन को इस तरीके से दिखाने का अच्चा मौका है यह जबकि लोक सभा चुनावों की घोषणा कुछ ही दिनों पहले हो चुकी है.राजनीति के राजपथ पर लोहिया के लोग अब उनकी(लोहिया)तरह या सिद्धांतों के आस-पास कितने रह गए हैं,यह तो नहीं कहा जा सकता पर हाँ इतना जरुर है कि आज की राजनीती में अपनी जुगाली कैसे चलाते रहनी है यह बहुत अच्छे से पता है."slumdog..."तक पहुँचने का ये रास्ता वाकई लाजवाब है पर क्या करें इस खोपडी में यह बात आसानी से नहीं घुसती कि बस यूँ ही फिल्म देखने जा रहा हूँ.अपने उपलब्धियों के साथ ही अगर नीतिश जी जनता दरबार में जाएँ तो ही अच्छा है क्योंकि उनके फेवर में यह बात कम-से-कम (लालू यादव के बाद...

भावी ब्यूरोक्रेट्स के दिमाग में घुसा गोबर

Image
कल से डीयू के क्रिश्चियन कालोनी में एक नौटंकी शुरू हो गयी है.जैसा कि आप सभी जानते हैं पटेल चेस्ट का यह इलाका मशहूर है इस बात से कि यहाँ से छोटे-छोटे शहरों से पढ़ कर आये बच्चे प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं.शायद इसीलिए इस जगह को प्रशासनिक सेवाओं में जाने वालों की फैक्ट्री कही जाती है.आंकडे जैसा बताते हैं कि इस कालोनी में दड़बेनुमा कमरों में लगभग ४००० से अधिक युवा अपनी ज़वानी को एक लक्ष्य के पीछे गला रहे हैं.इनके लिए रात-दिन का मतलब नहीं है.इनके डिस्कशन में अभी तक हमें देश-दुनिया की हलचलें ही सुनने में आती थी.डीयू के पीजी होस्टल्स में रहने वाले स्टूडेंट्स किसी बात की तथ्यात्मकता बताने के लिए यह कह देते रहे हैं कि 'भाई मेरी बात पे भरोसा ना हो तो पटेल चेस्ट /क्रिश्चियन कालोनी के लड़कों से पता कर लो'-पर अब यह स्थिति पिछले दो दिनों से बदली हुई है और रात भर जागने वाला यह इलाका आजकाल इधर-उधर मुहँ छुपाता फिर रहा है.पुलिस की दबिश इलाके में बढ़ गयी है और हमारे कल के ब्यूरोक्रेट्स आसपास के अपने अन्य मित्रों के यहाँ सिर छुपाते फिर रहे हैं..कुछेक की तो गिरफ्तारी भी हुई ...